Department of Gandhian and Peace Studies

About Department

Mankind is struggling to escape itself from the evils of the industrial civilisation, greed based economic system and immoral political conditioning, but unfortunately, there is no way to get rid of. In such darkness the thoughts Mahatma Gandhi could be torchbearer. Only Gandhi Ji’s philosophy can bridge the Cartesian division (duality of mind and body). His dedication to truth, non-violence, morality, equity, human dignity and freedom is well defined and it’s well examined fact that his way to live, can free us from many paradoxes. Keeping this in mind Mahatma Gandhi Central University established the Department of Gandhian and Peace Studies in 2019.

Department offers Master of Arts (M.A.), Master of Philosophy (M.Phil.) and Doctor of Philosophy (Ph.D.) programmes in Gandhian and Peace Studies. Department is committed towards enhancing research to all aspects of Gandhian Thought and Peace. With the aim of establishing a Gandhian ideas-based research centre, the department will endeavour to promote interdisciplinary research. Department aims to develop Gandhian thoughts as methodological tool to understand, explain and analyse conflicts and violence world-wide. By the teaching and research, department targets to develop the principles and practices of Gandhian ideas and providing profound knowledge of the history, theory and practice. Apart from class room teaching, dissertation/Seminar, Project writing and field study is the essential component of programmes. This evolving discipline is an innovation in order to explore the Gandhian philosophy in perspective of peace and conflict resolution and to offer a platform to the young generation for enlightened citizenship.

वर्तमान में मानव जाति औद्योगिक सभ्यता, लालच आधारित बाजार अर्थव्यवस्था तथा नैतिकता-विहीन राजनीति इत्यादि बुराइयों की जकड़न से निकलने हेतु संघर्ष कर रही है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इससे मुक्ति की कोई वीथिका दृष्टिगत नहीं होती। इस अंधकारमय स्थिति में गांधी जी ही एक मात्र प्रकाश पुंज के रूप में नजर आते हैं। गांधी जी का दर्शन ही मानव के मानसिक एवं शारीरिक द्वंद्व को पाटने में सक्षम हो सकता है। सत्य, अंहिसा, नैतिकता, समता, मानवीय गरिमा एवं स्वतंत्रता के प्रति उनका समर्पण उनके जीवन दर्शन का महत्वपूर्ण भाग है। वस्तुतः यह एक तथ्य है कि उनका जीवन दर्शन हमें अनेक प्रकार के विरोधाभासों से मुक्त कर सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2019 में गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग की स्थापना की गई।

विभाग, गांधी एवं शांति अध्ययन में मास्टर ऑफ़ आर्ट्स (एम.ए.), मास्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी (एम.फिल.) तथा डॉक्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी (पीएच.डी.) कार्यक्रमों का संचालन करता है। विभाग की प्रतिबद्धता मूलतः गांधी दर्शन एवं शांति के सभी पहलुओं पर शोध के सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक आयामों को खोजने एवं विकसित करने के प्रति है। साथ ही अंतःअनुशासनात्मक शोध को दृष्टिगत रखते हुए, गांधी चिंतन पर आधारित अनुसंधान केन्द्र का विकास करना भी विभाग का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। विभाग का एक प्रमुख उद्देश्य विश्व में होने संघर्षों और हिंसा को गांधीय दृष्टि से समझने, उनका विश्लेषण करने, उनके निदान हेतु गांधीय तकनीकों को विकसित करना तथा उनकी व्यवहारिकता की खोज करना है। शिक्षण एवं अनुसंधान के माध्यम से विभाग का लक्ष्य गांधीय विचारों पर आधारित सिद्धांतों एवं क्रियाओं को विकसित करना तथा इनके ऐतिहासिक, सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक ज्ञान को अभिवृद्ध करना है। कक्षा कक्ष शिक्षण-अधिगम के अतिरिक्त शोध प्रबंध लेखन, संगोष्ठी, परियोजना एवं क्षेत्रीय अध्ययन, विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण भाग है। एक विकसित होते हुए अनुशासन के रूप में यह विषय एक नवाचार है जिसके माध्यम से न केवल शांति एवं संघर्ष निवारण के परिप्रेक्ष्य गांधी दर्शन का अन्वेषण किया जा सकेगा वरन् प्रबुद्ध नागरिकता के लिए युवा पीढ़ि को एक मंच प्रदान किया जा सकेगा।